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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 73, नवंबर(द्वितीय), 2019

शिक्षाविद, साहित्यकार डॉ दिग्विजय शर्मा को मेरठ में "क्रांतिधरा अंतरराष्ट्रीय साहित्य साधक सम्मान" से सम्मानित किया गया

मेरठ वह क्रांतिधरा की भूमि है जहाँ भारत की प्रथम आजादी की लड़ाई 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू की गई थी। भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में यह दिनांक दर्ज है मेरठ से भारत में आजादी के आंदोलन की शुरुआत हुई जो बाद में पूरे देश में फैल गई ।साथियों आपको बताते हुए हर्ष हो रहा है की इस क्रांतिधरा पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी महाकुंभ में जिसे मेरठ में क्रांतिधरा (लिटरेचर) साहित्यिक महाकुम्भ का नाम दिया गया इस नाम से ही प्रत्येक वर्ष आयोजन किया जाता है । संस्था के संस्थापक डॉ योगेंद्र शर्मा अरुण, अध्यक्ष डॉ विजय पंडित, सचिव पूनम पण्डित ने भव्य आयोजन किया। जिसमें मेरठ लिटरेचर फेस्टिवल में परम पूज्य जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी जो मुख्य अतिथि के रूप में वहां पधारे। परम पूज्य डॉक्टर लोकेश मुनि जी मुख्य वक्ता के रूप में मेरठ लिटरेचर फेस्टिवल में पहुंचे। देश और विदेश से पहुंचने वाले साहित्यकारो में प्रोफेसर सरन घई कनाडा से लेखक हैं मुख्य वक्ता के रूप में वहां पधारे। बेल्जियम से पधारे कपिल कुमार जी ,जापान से पधारी डॉ रमा शर्मा जी ,नेपाल से करुणा झा जी अन्य देशों से साहित्यिक विद्वान भी पधारे।आईआईएमटी विश्वविद्यालय के सभागार में कार्यक्रम का आयोजन हुआ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ योगेश मोहन गुप्ता ने सभी अतिथियों का स्वागत किया सत्कार किया आभार डॉ विजय पण्डित ने व्यक्त किया। साथियों हिंदी साहित्य के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखे जाने वाले मेरठ लिटरेचर फेस्टिवल नाम हमेशा यादओर स्मरणीय रहेगा मुझे जो मान सम्मान मेरठ लिटरेचर फेस्टिवल मेरठ लिटरेचर फेस्टिवल में देश-विदेश से पूरे भारत से कनाडा से जापान से मॉरीशस नेपाल इंडोनेशिया बेल्जियम नेपाल, इथोपिया और भारत के लगभग प्रांतों के लोग इसमें शामिल हुए। डॉ शर्मा की हिंदी के प्रति निष्ठा और योगदान विगत 15 वर्षों से हिंदी के प्रचार प्रसार के योगदान व देश विदेश की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित हो चुके हैं। इस अवसर पर डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा को "क्रांतिधराअंतरराष्ट्रीय साहित्य साधक सम्मान " से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर देश के महान साहित्यकार शिक्षाविद उपस्थित रहे जिनमें मुख्य हैं डॉ कामराज सिंधु, डॉ विदुषी शर्मा, डॉ सुधाकर पाठक, डॉ रमा वर्मा, डॉ स्वेता दीप्ति, सच्चिदानन्द, डॉ नवीनचंद्र लोहानी, डॉ गम्भीर, सत्यपाल सत्यम, एडवीकेट चित्रा सिंह, एस के दीक्षित, कैलाश जोशी, विशन सागर, शशि श्याल, अशोक मैत्रेय, ओमप्रकाश छत्रिय, डॉ देवनारायण शर्मा, डॉ सुषमा चौधरी, डॉ मोनिका शर्मा, राजकुमार राजन, कवि मनोज, विवेक बजपुरी, ललित जोशी, सत्यपाल सत्यम, अजब पापुलर, देश विदेश के कोेने कोने से हिंदी के मूर्धन्य विद्वान उपस्थित हुए, हिंदी को लेकर विचार विमर्श किया गया की हिंदी किस प्रकार विश्व में अपनी जगह स्थान बना सकती हैं हिंदी व्यापार की भाषा किस तरह बन सकती है आए दिन हिंदी को लेकर अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय सम्मेलन संगोष्ठी हो रही है ,लेकिन हिंदी जहां है वहां आज भी उसी हालात परिस्थिति में है हमें सोचना होगा कि हिंदी को किस प्रकार से विश्व के मानचित्र पर लाया जाए।और हिंदी को वो समान दिया जाए जो अन्य भाषाओं को दिया जाता है। आए दिन हिंदी को लेकर लोकसभा में चर्चा परिचर्चा की जाती है कि हिंदी देश की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए ।यह कैसे संभव हो सकता है आज हमें आजाद हुए 72 वर्ष हो गए हैं लेकिन देश में राजभाषा तो है लेकिन अब तक अपनी कोई राष्ट्रभाषा नहीं है यह बड़ा चिंतनीय विचारणीय विषय है। जबकि हिंदी को पूरे विश्व में एक सम्मानित रूप से देखा जाता है केवल और केवल भारत में इस को दोयम का दर्जा दिया गया है मैं मानता हूं कि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठीओं में हिंदी पर जो चर्चा परिचर्चा हो रही है वह किसी मुकाम किसी निष्कर्ष पर जरूर पहुंचेगी। मेरा मानना है कि 21वीं सदी में हिंदी विश्व की भाषा होगी। यह साहित्यकारों की कहानीकारों की और हिंदी से जुड़े हुए सब तमाम लोगों की भावनाएं हैं हिंदी के प्रति जो लग्न है उनकी मेहनत है एक दिन जरूर रंग लाएगी मेरठ फेस्टिवल में हिंदी को लेकर जो चर्चा हुई निष्कर्ष यह निकला कि हम हिंदी को जब तक दिल से दिमाग से नहीं जुड़ेंगे तब तक हिंदी का विकास होना संभव नहीं है। भारत में हिंदी को जब तक हम अनिवार्य विषय नहीं शुरू करेंगे स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक ।भारत के सर्वोच्च न्यायालय से उच्च न्यायालय तक या सरकारी कामकाज जब तक हिंदी में नहीं होंगे जब तक यह किसी मुकाम तक नहीं पहुच सकती सरकार के जितने भी कार्य है वह सब हिंदी में हो जब यह कार्य शुरू हो जाएंगे मानो हिंदी अपने आप में एक आदरणीय भाषा के रूप में देखी जाएगी।

वहीं गजियाबाद में पिता काव्य सृजन अंतरराष्ट्रीय काव्य महोत्सव गाजियाबाद, संस्कार भारती गाजियाबाद द्वारा आयोजित "पिता काव्य सृजन महोत्सव" नेहरूनगर स्थिति दुर्गावती हेमराज टाह सरस्वती विद्या मंदिर में देश विदेश के250 से अधिक कवि कवयित्रियों ने ' पिता' विषय पर काव्यपाठ किया। एक विषय पर एक स्थान पर250 से अधिक कवियों का काव्यपाठ से एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना जो गाजियाबाद की धरती पर। संस्कार भारती के राष्ट्रीय और प्रान्तीय अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे। श्री बांकेलाल गौड़ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि संस्कार भारती का हमेशा रहा लक्ष्य है अपने कला,कविता से राष्ट्रप्रेम को परिलक्षित करना। वही इस कार्यक्रम में पिता विषय पर सृजन से वातावरण बना है। इस अंतरराष्ट्रीय काव्य महोत्सव में कपिल कुमार(,बेल्जियम),डॉ रमा शर्मा( जापान ), डॉ वासुदेव काफ़्ले, डॉ प्रियम्बदा आचार्य काफ़्ले, डॉ विधान आचार्य (नेपाल ) डॉ जया वर्मा, डॉ दिव्या माथुर(इंग्लैंड) आदि देशों के कवियों ने अपनी पिता विषय पर रचना पढ़ी गई। जिसमें आगरा के डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा को संस्कार भारती द्वारा शॉल पहनाकर और स्मृति चिन्ह व प्रशस्तिपत्र देकर "श्री लक्ष्मी हरिभाऊ वाकणकर सम्मान" से सम्मानित किया। विशाल कार्यक्रम की भव्यता सभी ने ह्रदय से स्वागत किया । विद्यालय में 250 कवियों के कविता पाठ के लिये पांच मंच बनाये गए। जिन पाँचो मंचों पर अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि संचालक संयोजक अलग अलग थे। काव्यपाठ के उपरान्त सभी कवियों को से अलंकृत किया गया। प्रत्येक कवि अपने निर्धारित मंच पर पहुंच कर कविता पाठ किया l साथ ही पिता विषय पर प्राप्त रचनाओ का एक बृहद काव्य संकलन भी निकाला जायेगा जिसका विमोचन किसी भव्य कार्यक्रम में होगा।

इस अवसर पर संस्कार भारती के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष बांकेलाल गौड़, अखिल भारतीय सह साहित्य विधा प्रमुख आचार्य देवेन्द्र देव, सदस्य अखिल भारतीय साहित्य विधा गजेन्द्र सोलंकी, क्षेत्र प्रमुख देवेन्द्र रावत, सह क्षेत्र प्रमुख डॉ सुबोध गुप्ता, प्रांतीय अध्यक्ष डॉ राजीव लोचन शर्मा, प्रांतीय सह महामंत्री चन्द्रभानु मिश्र, डॉक्टर राकेश अग्रवाल,प्रांतीय मंत्री संदीप दत्ता आदि अधिकारियों का सानिध्य प्राप्त हुआ। गाजियाबाद में अंतर्राष्ट्रीय गौरव कृष्णमित्र, डॉ जय सिंह आर्य, बाबा कानपुरी,मासूम गाज़ियाबादी, डॉ वीरदेव सिंह मार्तण्ड,राज कौशिक,डॉ सरोजिनी तन्हा, डॉ मीनाक्षी कहकशाँ, महेश सक्सेना, डॉक्टर बी एल ग़ौड़, डॉ मधु चतुर्वेदी डॉ तारा सिंह अंशुल आदि मंचो पर अतिथि के रूप में रहे। पाँचो मंचो का संचालन, सीमा सिंह,निवेदिता शर्मा, ब्रह्मप्रकाश बशिष्ठ, सोनम यादव, आदि कवियों ने किया पंजीकरण की भूमिका ब्रजनन्दन पचौरी, भूपेन्द्र त्यागी, डॉ अनिल वशिष्ठ, अरुण अग्रवाल,अतुल प्रकाश भटनागर राजेंद्र प्रसाद बंसल,आदि ने निभाई । इस विशाल कार्यक्रम को भव्य रूप देने में जिसमें प्रांतीय सह महामंत्री चंद्रभानु मिश्र,विभाग संयोजक डॉ राजीव पाण्डेय, जिला संयोजक डॉ जयप्रकाश मिश्र, जिला अध्यक्ष डॉ वीणा मित्तल, उपाध्यक्ष विनोद पाण्डेय,जिला महामंत्री डॉ अनिल वशिष्ठ, जिला कोषाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद बंसल, राजपाल त्यागी , राजीव सिंघल आदि ने निभायी ।इस कार्यक्रम में शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चढ़-बढ़ कर भाग लिया जिसमें आर के आर्य ,प्रीतम लाल,प्रशांत वत्स जैसे नाम उल्लेखनीय है l


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