मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

थोड़ा फासला रखिए

सलिल सरोज

. हर रिश्ते में थोड़ा फासला रखिए अभी से ही सही ये फैसला रखिए दूरियाँ खलेंगी लेकिन खिलेंगी भी अपने अहसासों पर हौसला रखिए हर कोई तो ख़ुशी का कायल नहीं हर घडी कोई नया मसअला रखिए सीख जाएँगें दिल बहलाने का हुनर हर मौसम में ही नया जुमला रखिए तय हो जाएँगी ऐसे हर कठिन डगर ज़मीर में सलामत मुआमला रखिए

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें