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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 73, नवंबर(द्वितीय), 2019

काम में कैसी शरम?

राजीव कुमार

’’ खेती में अब उतना फायदा हमको नजर नहीं आता है। खेतों को बंटाईदार के हवाले करके प्रदेश निकलना होगा, काम-धंधा की तलाश में। ’’ मनोहर ने उदास होकर अपने प्रिय मित्र रघु से कहा। रघू भी मनोहर की बात सुनकर निराश हो गया। रघु का मनोहर के सिवाय कोई भी जीगरी दोस्त नहीं था।

रघू ने कहा ’’ बाहर जाने की बात क्यों करते हो? यहीं पर छोटा-मोटा कोई धंधा करो। परिवार के साथ ही रहो। ’’

मनोहर कुछ सोचते-सोचते पूरानी यादों में खो गया। एक दिन बगल गांव से लौटते ही उसने ( मनोहर ) अपने पिता से कहा ’’ बाबू जी, कल से मैं बाजा के सट्टे पर नहीं जाउंगा। ’’

पिता ने उत्सुकता वश पुछा ’’ क्यों बेटा, क्या हुआ? ’’

’’ सब कहता है, ऐ बाजा वाला ये गाना बजाओ, वो गाना बजाओ। हमको बहुत शर्म आता है। ’’

’’ अरे बाजा का बिजनस किया है तो क्या बोलेगा? ’’ मनोहर के पिता ने उसको बहुत समझाया और न मानने पर पूरा म्युजीक सिस्टम सस्ते में ही बेच दिया।

म्नोहर के पिता तो कभी भी नहीं मानते वो तो मनोहर की माँ ने अपनी कसम देकर आटा चक्की खोलवा दिया। मनोहर के पिता ने मनोहर को धमकी देते हुए कहा था ’’ पिछले बार तुम्हारे कारण नुकसान हुआ था। इस बार वैसी बेहुदगी मत करना। मन लगाकर मील चलाना। ’’

अभी एक महिना भी नहीं हुआ कि मनोहर अपने पिता जी के पास आकर रोने लगा और कहने लगा ’’ पिता जी हमको माफ कर दिजीए। लोग हमको कहता है कि मील वाला गेंहु बदल देता है और आटा बहुत पतला कर देता है और जला देता है। ’’ उसको पिता ने समझाते हुए कहा ’’ अगर किसी का आटा खराब होगा तो बोलेगा ही। ’’

मनोहर ने धीरे से डरते हुए कहा ’’ सब मीलवाला बोलता है। ’’

’’ अब तुम मील का मालिक है तो मीलवाला बोलेगा ही। ’’

मनोहर ’’ नहीं बाबू जी, मैं अब मील नहीं चलाउंगा। ’’

पिता जी ’’ साला कमीना कहीं का, बाजा वाला बोल दिया तो बाजा नहीं बजाएगा। मीलवाला कहलवाने में शर्म आता है। तुम कहां का नवाब है रे? कर्ज लेकर और जमीन बेचकर तुमको गधा से आदमी बनाने का प्रयास कर रहे थे। ’’ उनकी बातो ंसे और चेहरे पर कभी न दिखायी देने वाला गुस्सा झलक रहा था। मनोहर की माँ डरकर कोना में खड़ी हो गयी थी। मनोहर पुरानी यादों से बाहर आते ही रघु से बोला ’’ तु ठीक कहता है, यहीं धंधा करूंगा, पहले वाली गलती दोबारा नहीं करूंगा। ’’


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