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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

यह सब .....आखिर कब तक ....

वीरेन्द्र कौशल

ज़िन्दगी हमारी ...... अब तक जीवन आखिर ...... कब तक सांसे चल रही ...... तब तक खून में रवानगी ..... जब तक दिल धड़क रहा ..... कब तक जेब में पैसा ..... कब तक हौंसले बुलंद ..... नभ तक रिशते निभ रहे .... रब्ब तक दोस्ती ज़ारी ..... शहर तक जुबान हमारी ..... पहर तक दुश्मनी हमारी ..... झूठ तक इच्छा हमारी ..... ठूँठ तक वायदे हमारे ..... आवाम तक साथ हमारे ..... शाम तक काम हमारे ..... नाम तक जुड़ाव हमारे ..... दाम तक विश्वास सारे ..... आत्मा तक ईमान हमारे .... परमात्मा तक उड़ान हमारी ..... आसमान तक सम्बंध सारे ..... शमशान तक यह सब ..... आखिर कब तक .... यह सब ..... आखिर कब तक ...


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