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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

ये कैसा बचपन???

शुचि भवि

ये कैसा बचपन??? कैसा ये बाल-दिवस??? दो रोटी तलाशती दो छोटी आँखें,, दो सपने देखती दो सूनी आँखें,, दो हाथ फैलाती दो पैसे माँगती दो हाथ जोड़े दो लोक माँगती,,, दो पदचिन्ह भांपती दो कदम चलती दो बीघा जमीन दो लम्हे नापती,,, दो अश्क बहाती दो पथराई आँखें,, दो जीवित पल तलाशती दो भरमाई आँखे


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