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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

लड़कियां

शिखा परी

कब्र सी बन गई थी जिंदगी वहां पर सुना था बहुत सी लड़कियां को गर्भ में मारा गया जहां पर एक लड़की के लिए जाने कितनी लड़कियों की बलि दी गई कितनी औरतों ने अपने पेट से भर भर के खून निकल वाया खून के छींटे से सने थे सबके हाथ कत्ल जैसा महसूस होता था वहां पर पर किसी ने भी उसे कत्ल नहीं माना लड़के की चाह के लिए लड़कियों की बलि चढ़ रही थी लड़का वंश आगे बढ़ाएगा लड़की उस वंश के मकान को सजाएगी लड़कों की सौगात थी वहां पर वहां लड़कियों की क्या औकात थी हर तरफ बेबस लड़कियां पड़ी थी अस्पताल के पीछे कब्र बनी थी 100 लड़कियां मार दी जाती थी जहां पर बेटी लक्ष्मी होती है लिखा था एक दीवार पर

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