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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

इंतजार न कर

रौली मिश्रा

गुजरी हुई जिंदगी के उन लम्हों को तू याद ना कर तकदीर में नहीं है जो उसका इंतजार न कर जो लिखा है तेरी किस्मत में वह तो होकर रहेगा उस वक्त के लिए तू आज को बदल बर्बाद ना कर हंसकर अपने का तू स्वागत कर भूली बिसरी चीजों को तू याद ना कर जो बुरा होगा उसे तू बदल नहीं पाएगा और अच्छे को तू खुशियों से संभाल नहीं पाएगा इंतजार कर तो उस वक्त का जब होगा तेरे जीवन में नया सवेरा हर उलझन को तू दूर कर पाएगा तब हंसते हुए इस जिंदगी को खुशनुमा तू बना पाएगा।।


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