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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

तुम से है मुहब्बत

रवि प्रभात

तुम से है मुहब्बत इसलिये तो लिख देता हूँ दिल में दबा कर कितना रखूं अपने जज्बात लिख देता हूँ इलज़ाम तुम ही लगाते हो इसीलिए अपने इरादे लिख देता हूँ बरसो छुपाया है अपनी मुहब्बत को इसीलिए हर बार अपने अरमान लिख देता हूँ बेबस दिल में जो आता है अपने मुहब्बत का गुनाह लिख देता हूँ अपनी मुहब्बत को कहा ढूँढू इसीलिए हर बार तुम्हारे दिल का पता लिख देता हूँ एक बार पास आकर तो देखो अपनी जिंदगी तुम्हारे नाम लिख देता हूँ

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