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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

दफ़न दर्द

राजीव डोगरा

दर्द लिखते लिखते यूं ही बेदर्द हो चले। मोहब्बत के सफर में हम भी हर किसी के हमदर्द हो चले। दफन किया जब दर्द को हमने सीने में तो अंदर ही अंदर से हम टूटते चलेगे। और लबों पर हमारे दर्द भरे अफसाने फूटते चलेंगे। बयां किया जब दर्द को हमने, तो लोग हमसे रूठ के चलेगे। और अपने,पराए लोग हम से छुटते चलेगे।


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