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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

संस्कार

कवि राजेश पुरोहित

पश्चिम के अंधानुकरण ने संस्कार हम से छीन लिए। जब से एकल परिवार हुए माता पिता छीन लिए।। दादी नानी की कहानियाँ घरेलू नुस्खे छीन लिए। प्यार ममता वात्सल्य सारे बच्चों से छीन लिए।। अपनत्व प्रेम मान मनुहार लाड़ दुलार छीन लिए। दया सहानुभूति सहयोग त्याग समर्पण छीन लिए।। मतलबपरस्ती ने चैन की नींद के पल सारे छीन लिए। धन कमाने की होड़ ने इंसान के संस्कार छीन लिए।। भौतिक विलासिता ने निरोग रहने के तरीके छीन लिए। व्यायाम शारीरिक खेल कुश्ती दंगल सारे छीन लिए।। प्रणाम नमन वंदना प्रार्थना के तौर तरीक़े छीन लिए। हाय बाय डेड मोम ने पिताजी माताजी छीन लिए।।

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