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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

वक्त का वेग

डा॰ नितिषा श्रीवास्तव

बहुत कुछ जाताना था... बहुत कुछ भुनाना था... वक्त का वेग, बहा ले गया सारे आवेश। बहुत कुछ बताना था... बहुत कुछ सुनाना था... वक्त का वेग, चुरा ले गया सारे शब्दकोश। कुछ अनकहे फसाने थे... कुछ किस्से सुनाने थे... वक्त का वेग, बहा ले गया सारे संदेश। कुछ कसमें थी खाने को... कुछ वादे थे निभाने को... वक्त का वेग, जला गया सारे आवेग। कुछ तालीम थी देने को... कुछ सीख थी लेने को... वक्त का वेग, बहा कर ले गया सारे अंदेश। कुछ जख्म थे दिखाने को... कुछ दर्द थे महसूस कराने को... वक्त का वेग, सिखा गया जख्मों के साथ जीना।

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