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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

मोहताज साँसे

हरिपाल सिंह रावत 'पथिक'

पल-पल की.. मोहताज साँसे, धीरे-धीरे झुरियों से.. ढ़लता जिस्म, हर रोज... बेहिसाब सा... बढ़ता अहम, रिश्तों की कड़वाहट। आखिर किस लिये??? बस इसीलिये.... कि इक पल ‍आये मौत, लपेटे स्याह रात, बोझल दिन, और छीन ले... सारा गुरुर, सारा अंहकार, मोहताज सांसे और जिस्म। सब कुछ।


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