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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

पहाड़ पुरुष
(दशरथ माझी की याद में लिखी गई यह कविता उन्ही को समर्पित है )

चंद्र मोहन किस्कू

प्रतिदिन ही सुबह- सुबह धर्म को स्मरण कर दूर स्वर्ग को गई प्यार को याद कर छाती भरकर साँस लेता हूँ -- जिससे मैं शक्ति पाता हूँ और काम करने के लिए दिल और शक्ति का संचार होता है . इसलिए हरदिन अभाव और कष्ट की पहाड़ को पार करता हूँ उसके सर पर चढ़कर हरदिन ही जीत का झंडा फहराता हूँ . पहाड़ कभी टूटता नहीं है कठोर और स्थिर खड़े रहने की धर्म वह छोड़ते नहीं है केवल मेरा प्यार और दृढ़चित्त को देखकर थोड़ा झुकते है भविष्य को यादकर बहुत सारे कष्ट को तोड़कर काम में लगे रहता हूँ शायद दूर स्वर्ग में रह रही जीवनसंगिनी मेरी मेरी मन में आकर शक्ति का संचार करती है नहीं तो मैं बूढ़े हड्डी से कैसे काम कार्य ?


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