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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

सुन्दर लड़की

चंद्र मोहन किस्कू

सबसे सुन्दर लड़की इस धूल भरी धरती में वह नहीं है जो लाल कार्पेट पर चलकर आती है उसकी सर पर हीरों से जड़ा मुकुट पहनाया जाता है हाथतालियों की गड़गड़ाहट से भर जाता है दुनिया भर के मिडिया केमेरे की प्रकाश के साथ उसे कवर करते है . सबसे सुन्दर लड़की वह है गोबर से लथपथ हाथों से छाटका* को गोबर दे रही है मिट्टी की दीवाल को समान काटकर लिपती है और पोतती है दीवाल पर रंग - विरंगे सुन्दर चित्र बनाती है सर पर खाली टोकरी लेकर गोंइठा चुनने जाती है अपनी सहेलियों के साथ लकड़ी और पत्ता चुनने जाती है भरपूर धूप में गाय चराने जाती है , साड़ी पहनकर अखड़ा में नाचती है सुमधुर स्वर में गाती है और भरपूर रौद्र धूप में सूरज की पीठ दिखाकर काम करती है दो बिलान पेट के लिए ऐसे कर ही सबसे सुन्दर लड़की दुनिया के सामने आने से पहले ही काली हो जाती है उसकी देह . * छाटका एक संताली शब्द है
जिसका अर्थ घर के बाहर का आंगन .


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