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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

सौ- सौ जतन किए

डॉ. मनोहर अभय

अँजुरी भर किरनें पाने को सौ- सौ जतन किए कभी सूर्य को अर्घ्य चढ़ाया चँदा को चन्दन टीका वरुण-पवन के पाँव पखारे अग्निहोत्र में नाम प्रभू का मन में मनन किए | किस्से सुने पुराने करीं नई चर्चाएँ अंतःपुर के जंगल में वांची दिव्य ऋचाएँ दशानन दहन किए | फिर भी घेरे खड़े अँधेरे रात खड़ी मुस्काती बुझी- बुझी सी लगती अपनी संझावाती ज्योति नीर की बूँदें पाने कितने यतन किए |


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