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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 74, दिसम्बर(प्रथम), 2019

सौभागिन के पीर के कइसे हम पीर कहीं

विद्या शंकर विद्यार्थी

उमड़ल नीर के कइसे हम नीर कहीं बढ़ल दरद के कइसे हम पीर कहीं नीर फफात बा प्रेम में ई सच्चाई बा पलक के तीर के कइसे हम तीर कहीं फफात नीर में डुबलीं तऽ डुबलीं हम रात के सुसुकल कइसे हम फजीर कहीं उनुका के जेहन में बसा लिहले बानीं दिल के धड़कन के कइसे हम अधीर कहीं सभे के कहाँ ई सौगात मिलेला विद्या सौभागिन के पीर के कइसे हम पीर कहीं ।

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