Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



नहीं धर्म का अर्थ होता है डर


सतविन्द्र कुमार राणा


 
नहीं धर्म का अर्थ होता है डर
सही जिंदगी की ये होता डगर

किया ख़ौफ़ का जिसने पोषण सदा
रहे जिक्र उसका ही क्यों होठों पर

बड़े कर्म जिसके वही है बड़ा
बड़े बोल होते न कुछ भी इधर।

बिना ईश इच्छा न होता है कुछ
जो है तेरे बस में तू बस उसको कर।

हमेशा पढ़े जाएँ जीवन बड़े
गुणों को तू उनके जरा खुद में धर।

ए 'राणा' जो स्थायी हमेशा रहे
ये जानो कि गुण होते हैं ऐसा जऱ।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें