Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



मैं किसी की निगाहों से अभी उबरा नहीं हूँ


सलिल सरोज


 
मुझे मत दिखा अभी ये चाँद सितारे
मैं किसी की निगाहों से अभी उबरा नहीं हूँ

जब से तुम्हारी निगाहों का सूरमा है मेरी आँखों में
तब से फिर खुद को मैने सँवारा  नहीं है

मत कर मुझे इतिहास में यूँ तो दफ़्न अभी
मैं पुराना लम्हा तो हूँ पर अभी गुज़रा नहीं हूँ

मुझ में मौजूद है मिठास इस बूढ़े  पेड़ की
जड़ से दूर तो हूँ पर डाली से बिछड़ा नहीं हूँ

शहर ने अपनी चकाचौंध से तुमको बेगाना कर दिया
मैं बेचारा बिछड़ा हुआ गाँव हूँ,पर उजड़ा नहीं हूँ	 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें