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वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



खुशी आई पर गम लेकर


हर्ष कुमार सेठ


 
खुशी आई पर गम लेकर
जिन्दगी तुम कितना लाई पर कुछ कम लेकर 
तुम मेरे दिल ओर सांसो में बसे हो 
ये बात तुमने भी बताई पर आँखे नम लेकर 
खुशी आई पर गम लेकर 

वो उल्फत की रात और तेरा छत पर आना
बार-बार मुझे देखना और मुँस्कुराना 
जिन्दगी फिर ना दोहरा पाई 
हमसे हमारा सारा दम लेकर 
खुशी आई पर गम लेकर 

अब कैसे मैं मोहब्बत की बात कंरू 
कैसे-कैसे हाथ पकडूं और इजहार कंरू 
मिलने आए हो अपने साथ अपना हमसफर लेकर 
खुशी आई पर गम लेकर 

तेरे जाने के बाद फरिश्ते भी आएं चाहे नूर लेकर 
पर तुमसे मोहब्बत की है तुम्ही को चाहूंगा 
तुमसे लिपट कर तुम्ही को 
अपनी मोहब्बत बताऊंगा, 
छोड़ना नहीं छोडना नहीं मुझे दुनियां की कोई भी नूर देकर 
खुशी आई पर गम लेकर 

इतना तो सता दो हमें 
जुबां पर तुम्हारा नाम ना आए 
सांस लू जब तो 
सांसो में कोई ख्याम ना आएं 
बस इतना कर दो की हमें कभी नीदं ना आए
नीदं आती है जब तो सपनो में फिर आते हो 
वो ही पहले जैसी उल्फत लेकर 
खुशी आई पर गम लेकर
 

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