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वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



इंतजार


तनुजा नंदिता


 
लम्हों में बेबस गुजरते हैं
तुम्हारा इंतजार करते हैं...
दिल की बेचैनी गर कहे तो
दीदार के लिए तरसते है...
पहले बनाया दीवानी मुझे
अब तुम्हारे नाम पे मरते है..
सांसों से बांधा धड़कनों को
वफ़ा बन कर यहां मिलते है...
किधर जांऊ बोलो तुम बिन
तन्हाई में आहें बस भरते है...
अहस्सासों के घेरे में समाया
बाहों में ले मोहब्बत करते है...
दिन किस्सा औ ख्वाब हिस्सा
जुदाई भी खामोशी से सहते है...
ऐ-नंदिता सब्र ही सब्र है हम-तुम 
जिंदगी चाहत तुम्हारे लिए जीते है.....!!		 
 

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