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वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



एक लड़की


पुनीता जैन


 
मेरे पिता को युद्ध ने मारा
कहती है 
एक लड़की

बर्छियों तलवारांें सी सैकड़ों आवाजें
हल्ला बोल देती उस पर
कहो
कहो कि युद्ध नहीं  /दुष्मन ने मारा 

निडर वह मुस्कुराती
चल देती है

बेसाख्ता प्रेम उमड़ आता है उस पर
जिसे पता है
युद्ध का अर्थ
दुश्मन  के अर्थ से पहले  !
	 

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