Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



आँसू


नवीन कुमार भट्ट


  
आँखों में आँसू भरे,खुशियों की सौगात।
सफल हुई ये इम्तिहां,मानी मेरी बात।।१

बेटा सीमा पे डटा,माता करे पुकार।
आँसू बहते रात दिन,मिले नही आधार।।२

आँसू पीकर रह लिये,गई न बाहर बात।
मर्यादा घर की लघीं,दिन हो चाहे रात।।३

खड़ी द्वार पे मात है,देख रही है राह।
आँसू बहते जा रहे,तनिक नहीं परवाह।।४

दिल पत्थर सा हो गया,गिरे न आँसू एक।
ऐसे लोगों को खुदा,देना खूब विवेक।।५

बेटी कब से चीखती,होकर के भयभीत।
आँसू की धारा बहे,सब अपनों में प्रीत।।६

मात-पिता देते सदा,रह राहों पर साथ।
गिरे कभी आँसू अगर,सदा लगाते हाथ।।७

हर बाधा को दूर कर,हमें कराते पान।
आँसू पीकर रह गये,वो मेरे भगवान।।८

आँसू बहते है तभी,जब वो जाते दूर।
प्रीतम आँखों के बनें,सदा रहे ये नूर।।९

कास हमारी बात को,आँसू करे बयान।
संकट में मझधार है,करिये इसे निदान।।१०
  

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें