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वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



दंगल


गुरुदेव प्रजापति


 
दंगल 
तो
रोज होते है
मेरे भीतर

रोज
लडता हूं
खुद से
अकेले अकेले

और
हर वक्त
मैं ही
हार जाता हूं
खुद से | 

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