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वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



तो क्या करोगी?


डॉ० अनिल चड्डा


 
तुमने तो कह दिया 
किसी से कहना न प्यार की बात 
गर आँखें तुम्हारी ही बोल उठीं 
तो क्या करोगी?

मैं तो मन बस में कर लूँगा 
भरी भीड़ में भी तुमसे नजर चुरा लूँगा 
नजर तुम्हारी ही बहक गई 
तो क्या करोगी?

तुम कहो तो मैं मुँह सी लूँगा 
तुमसे तो क्या, किसी से बात न करूँगा
गर लब तुम्हारे ही फड़फड़ा उठे 
तो क्या करोगी?

न तुमसे, न मुझसे छुपेगी ये बात 
कभी न कभी तो खुलेगी ये बात 
दुनिया ने फिर किए गर सवाल 
तो क्या करोगी?		 
 

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