Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



हमीद के दोहे


अब्दुल हमीद इदरीसी


 
दहकां के दुख दर्द का,तनिक नहीं आभास।
वोटन  खातिर  गाँव  में , झूठा  करें  प्रवास।

जनता किस बूते करे, इन पर फिर विश्वास।
वर्तमान को  खोद कर , बदल रहे इतिहास।

खास ज़हनियत  के रहे , हरदम ये तो दास।
शासन  इनका यूँ नहीं , आता सब को रास।

बालिंगका लगतानहीं,अनुभव उसको खास।
रोहित   बल्लेबाज़   है , फेंक रहा  फुलटास।

जनता की तकलीफ का,ज़रा नहीं अहसास।
अगड़म बगड़म काम कर,करा रहे परिहास।

दहकां = किसान		 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें