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वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



जाड़ा आया


डॉ. प्रमोद सोनवानी "पुष्प"


 
सूरज भैया जल्दी आकर ,
जाड़ा दूर भगाना तुम ।
सर-सर,सर-सर हवा चल रही,
गरमी हमें दिलाना तुम ।।1।।

जाड़ा के इन दिनों में ,
दूर कहीं मत जाना तुम ।
पास हमारे रहकर भैया ,
जाड़ा दूर भगाना तुम ।।2।।

जाड़ा हमें कपाता थर-थर ,
उसे तनिक समझाना तुम ।
ठिठुरन में कांपे न कोई ,
जाड़ा दूर भगाना तुम ।।3।।

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