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वर्ष: 3, अंक 50, दिसम्बर(प्रथम) , 2018



सर्दी आई


महेन्द्र देवांगन माटी


 

सुबह सुबह अब चली हवाएँ  । सर्दी आई जाड़ा लाए ।
ओढे कंबल और रजाई । हाथ ठिठुरते देखो भाई ।।
धूप लगे अब बड़े सुहाना  । बाबा बैठे गाये गाना ।।
भजिया पूड़ी सबको भाये । गरम गरम चटनी सँग खाये ।।
टोपी पहने काँपे लाला । आँखों में है चश्मा  काला ।।
आते झटपट खोले ताला । राम नाम का जपते माला ।।
बच्चे आते शोर मचाते । लाला जी को बहुत सताते ।।
धूम धड़ाका करते बच्चे । लेकिन मन के बिल्कुल सच्चे ।।
ताजा ताजा फल को खाओ । रोज सबेरे घूमने जाओ ।।
सुबह शाम अब दौड़ लगाओ । बीमारी सब दूर भगाओ ।।	 
 

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