Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



बाल मजदूरी बंद हो


राजीव कुमार


बाल श्रम मंत्रालय के सत निर्देश के बाद व्यवसायियों के बीच अफरा-तफरी मच गई, साथ ही साथ गरीब अभिभावकों की माली स्थिति और भी बदतर होने की चिंता सताने लगी। लंबे समय से गुम संतान के अभिभावकों को आशा की नई किरण स्पष्ट प्रतीत होने लगी।

जांच निरीक्षण समिति के मुखिया ने कहा कि ‘‘अग्रवाल इंडस्ट्रीज में तो कोई भी बाल मजदूर नहीं मिला। चलो, अब भालोटिया एंड संस मिल्स के गोदाम में देख लेते हैं, वहां तो बाल मजदूर जरूर मिल जाएंगा।’’

जांच निरीक्षण समिति के सदस्यों का स्वागत करने के लिए खुद सेठ धनराज भालोटिया खड़े थे, मगर समिति के सदस्य धनराज भालोटिया को नजरअंदाज करते हुए सीधे गोदाम में चले गए।

खाली हाथ वापस आकर निरीक्षण समिति के मुखिया ने धनराज भालोटिया से कहा, ‘‘सेठ जी, बाल मजदूरी तो आपके गोदाम में जरूर काम करते हैं, क्योंकि मेरे ही इलाके के शर्मा जी का बेटा यहां काम करता था। आपने जरूर कहीं छिपा दिया होगा।’’

धनराज भालोटिया ने कहा, ‘‘अच्छा-अच्छा तुम्हारे इलाके रानी पोखर का एक लड़का छोटा-सा काम तो जरूर आया था, लेकिन मैंने नाबालिक कहकर लौटा दिया था।’’

जांच निरीक्षण समिति के मुखिया ने मंत्री जी से कहा, ‘‘सर, लगभग बहुत सी फैक्टरियों में बाल मजदूर काम करते हैं, लेकिन सबने उनको कहीं छिपा दिया है।’’

मंत्री जी ने दांत निपोरकर कहा, ‘‘साले सब सयाने हो गए हैं।’’

बाल श्रम जांच समिति के मुखिया जब मंत्री आवास से निकल रहे थे कि गेट के पास ही बचपन का दोस्त रघु मिल गया और उसने कहा कि ‘‘घर की माली स्थिति ठीक नहीं है। मेरी भी तबीयत अकसर खराब रहती है, इसलिए मैंने अपने मुन्नू को मंत्री जी की ही फैक्ट्री में लगा दिया है। हालांकि अभी बालिग नहीं है और फिर उससे भी छोटी उम्र के कई बच्चे वहां काम करते हैं। बाल श्रम निरीक्षण समिति के मुखिया अनसुना करने में भी भलाई समझी, क्योंकि बात खुद बाल श्रम मंत्रालय के मंत्री की फैक्ट्री की थी।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें