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वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



अनाथ आश्रम


राजीव कुमार


दोनों को कमी खल रही थी। दोनों को एक-दूसरे की जरूरत महसूस हुई। अनाथ आश्रम के दस वर्षीय बालक रौशन और वृद्धा आश्रम के पैंसठ वर्षी राम अवतार को भी। किस्म के सताए दोनों पास आए। रौशन अकसर थोड़ा व्यस्त सड़क पार करके वृद्धा आश्रम पहुंच जाता, राम अवतार जी से मिलने।

राम अवतार जी रौशन को डांटते और कहते ‘‘गाड़ियां आती-जाती रहती हैं, तुम रिस्क लेकर यहां मत आया करो।’’

रौशन भी ‘ठीक है’ बोलकर वापस लौट जाता।

भीतर ही भीतर रौशन भी घुटता रहता, उसकी घुटन राम अवतार जी खुद रौशन से मिलने पहुंच जाते, अपने साथ वृद्धा आश्रम ले जाते और जी भरकर खेलते।

राम अवतार और रौशन को दादा-पोता की तरह खेलते देखकर वृद्धा आश्रम के लोगों ने सोचा कि क्यों न अनाथ आश्रम और वृद्धा आश्रम को मिला दिया जाए। बुजुर्गों को बेटे-बेटी मिल जाएंगे और बच्चों को बुजुर्गों का प्यार-दुलार।

दोनों आश्रमों के संचालक और वार्डन की सहमति जानकर अनाथ आश्रम और वृद्धा आश्रम में खुशी की लहर दौड़ गई, मगर अफसोस ऐसा हो न सका क्योंकि अनाथ आश्रम पर सत्ता पक्ष के सांसद का दबदबा था और वृद्धा आश्रम पर विपक्षी पार्टी के सांसद का।


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