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वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



अपना-पराया


अमित राज ‘अमित’


टंªगी- टंªगी......................... काॅलवेल बजी, रामू दौड़ते हुए दरवाजा खोला।

‘‘कौन है रामू?’’ सविता ने पूछाँ।

‘‘भिखारी है मालकिन।’’ रामू ने जवाब दिया।

‘‘क्या माँग रहा है?’’

‘‘मालकिन! भूखा है।’’

‘‘तो?’’

‘‘खाना माँग रहा है।’’

‘‘कोई खाना-वाना नहीं दरवाजा अच्छे से बन्द कर दों, यहाँ तो हर रोज कोई न कोई माँगने वाला आ ही मरता है, जैसे यहाँ खैरात बँट रही हो।’’

तभी कुत्ते की जोर से चीखने की आवाज़ सुनाई पडीं।

सविता ने अपनापन जताते हुए कहा- ‘‘ रामू देखों तो शेरू क्यों पुकार रहा है? शायद उसे भूख लगी होगी, उसके खाने का समय भी हो गया। तुम जाकर उसे ठोस और दूध दे दो, बेचारा बेजबान जीव भूख के मारे तड़प रहा है।


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