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वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



आयो सावन फिर मोहने.......


उमाशंकर सैनी


  
आयो सावन फिर मोहने, जनमानस के मन।
रिम-झिम बरस रहा पानी, झूम रहे जंगल और वन।।
 
काले-काले बादल देखो, गरज रहे है जोर से।
मोर-कृषक नाच रहे, देखो कितने शोर से।।
 
हरियाली की ओढ़ चुनरिया, मेघा रानी आई।
पहाड़ो मे झरनों की झर-झर, जैसे पायलिया बजाई।।
 
श्रावण के प्रति सोमवार, व्रत पाठ और पूजा।
बोले कवाड़िया बम-बम, ऐसा अमरनाथ जी न दूजा॥
 
पेड़ो पर लग गये है झूले, हवा लगे सुहानी।
तिज त्यौहार संग लाया, ये मौसम नूरानी।।
 

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