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वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



छुई-मुई की तरह


पवनेश ठकुराठी ‘पवन’


 	
रिमझिम- रिमझिम बारिश की बूंदें
टपक रही हैं
आसमान की छत से
पंछी गा रहे हैं
सात सुरों में
सावन के गीत
घर के भीतर कोई वियोगिनी 
प्रियतम के वियोग में
मुरझा गई है
छुई- मुई की तरह।
	 
 

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