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वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



वो शख्स


नरेश गुज्जर


  
वो शख्स जो मुसीबतों से लड़ना जानता था
नाउम्मीदी में उम्मीदें गड़ना जानता था,
अन्धेरों को चीर दिया करता था,
मायूसी को दूर भगाता था,
वो शख्स जो गम में भी मुस्कराता था,
वक्त के थपेड़ों को सह जाता था,
बार बार गिरकर फिर उठ जाता था,
वो शख्स जो तन्हाईयों को भी महफिल बनाता था,
अन्दर ही अन्दर घुट घुट कर अब मर रहा है वो.....

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