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वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



15 अगस्त ज़िंदाबाद


दीपक शर्मा


 
इस  देश मे जन्मा, पला  बड़ा
इस देश  मे पोसा किया खड़ा
मेरी  माँ से पहले है भारत माँ
मेरे वतन न्यौछावर तुझपे जाँ।।

तेरी  धरा से  उपजा खाते हैं हम
तेरा  पानी  पीकर ज़िन्दा  हैं हम 
तेरे दम से ही जग में है मेरा दम
वर्ना किसी का नही वज़ूद यहाँ।।

है गर्व कि आज ये दुनिया  सारी 
गीता  वेद  पुराणों  पर बलिहारी
पर देखो तो ज़रा षड्यंत्र  गद्दारी
हम कहते इनका अस्तित्व कहाँ।।

हे! भारत माँ तनिक शोक न कर
जब तक हैं  लाल तेरे  धरती  पर
तेरी आन पे क़ुर्बान कर देंगे  सिर
बाक़ी न रहेगा दुश्मन का निशाँ।।

"दीपक" ज्योति सी तेरी ज्वाला 
पहने सदा भगवा अमर दुशाला 
मेरा राष्ट्रगीत  राष्ट्रगान  निराला
चिरस्वतंत्र मेरा भारत हिन्दुस्तां।।

 
		 
 

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