Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



हँसी कहाँ से आएगी?


डॉ० अनिल चड्डा


 
उदासियों के पहलू में बैठे रहो
तो हँसी कहाँ से आएगी?
बात अपनी कह न सको 
तो समझ कहाँ से आएगी?

जो दर्द बाँटने से होता कम,
तो प्यार कुछ करता नहीं,
खुद ही न सम्भले तू अगर,
तो दर्द से मरता नहीं,
दोस्त हों वीराने,
तो ख़ुशी कहाँ से आएगी?

जवानियों की दास्ताँ, 
याद कितनी भी करो,
वो वक्त तो चला गया, 
चाह उसकी मत करो, 
अतीत से नहीं सीखा, 
तो समझ कहाँ से आएगी? 

दर्द को छुआ नहीं,
तो दर्द का है क्या पता,
आग से जले नहीं,
तो ताप का है क्या पता,
दर्द दूसरे का है,[चोट दूजे को लगी,]
तो समझ कहाँ से आएगी?
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें