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वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



छोटी सी है ये जिंदगानी


नरेंद्र श्रीवास्तव


 	
छोटी सी है ये जिंदगानी।
लड़ने की क्यों है ठानी।।

औरों से क्या लेना-देना?
खुद की हो मीठी वाणी।।

एक-दूजे की मदद करें ।
सबकी  है  बारी  आनी।।

सच का साथ सदा देना है।
झूठे को पड़े मुँह की खानी।।

जो भूखे,निर्बल,नंगे हैं।
उनपे सदा दया दिखलानी।।

न्याय,धर्म हों काम हमारे।
नीति रीत की सदा निभानी।।

सुख की गंगा बहे धरा पर।
जीवन नैया है पार लगानी।।
              

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