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वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



दोहे रमेश के स्वतंत्रता दिवस पर


रमेश शर्मा


 	
आजादी का पर्व है, .. झूम रहा है देश !
इसका होना चाहिए, सबको गर्व रमेश ! !

आजादी है देश की, ....वीरों का बलिदान !
नवयुग की नव पीढियां , दें वीरों को मान !!

इकहत्तर पूरे हुए,........आजादी के साल ! 
नहीं गुलामी का मगर,कटा ज़हन से जाल !!

आजादी का कब हुआ,हमें पूर्ण अहसास !
पहले गोरों के रहे ,...अब अपनों के दास !!

जिसको देखो बेधड़क, लूट रहा है देश !
आजादी के अर्थ को, समझे नहीं रमेश !!

आजादी के बाद से, दिन-दिन भड़की आग !
सत्तर सालों बाद भी,   नहीं सके हम जाग !!

भूखे को रोटी नहीं,रहने को न मकान ! 
हुआ देश आजाद ये,कैसे लूँ मै मान ! !

इकहत्तर पूरे हुए .,....आजादी के साल !
नेता तो खुशहाल हैं,पर जनता बदहाल !!

आजादी अब हो गई,  है ऐसा हथियार !
अपनों के आगे करे, अपनों को लाचार !!

सुनने वाला ही नहीं,  जब कोई फ़रियाद ! 
आजादी के बाद भी ,हम कितने आज़ाद !!

चलो उन्होंने कर दिया, फिर से यह अहसान !
आजादी के पर्व का,.... किया आज सम्मान !!

आजादी उनके कभी, .....आयी नही करीब !
रहीं झिड़कियां गालियाँ,जिनका यहाँ नसीब !!

भिन्न-भिन्न भाषा मगर, सबकी एक जुबान !
यूं ही हम कहते नही,.......मेरा देश महान ! !

भूखे को रोटी मिले,मिले हाथ को काम ! 
आजादी का अर्थ तब, जानेगी आवाम !!

झूठों को इज्जत मिले,सच्चों को दुत्कार ! 
आजादी का देश मे,......ये कैसा आधार!!. 

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