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वर्ष: 3, अंक 43, अगस्त(द्वितीय) , 2018



प्यारी बरखा


डॉ. प्रमोद सोनवानी "पुष्प"


 	                      
प्यारी बरखा बड़े प्यार से ,
ठण्डी हवा चलाती है ।
सूरज दादा को समझाकर ,
गरमी दूर भगाती है ।।1।।

ठण्डे-ठण्डे पानी से ,
हम सबको नहलाती है ।
रिमझिम-रिमझिम लोरी गाकर ,
वह तो हमें सुलाती है ।।2।।

हरी सब्जियाँ खूब खिलाती ,
बनती बड़ी सयानी है ।
सचमुच मन को भाती है ,
जब बरखा रानी आती है ।।3 ।।
 

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