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वर्ष: 2, अंक19, अगस्त(द्वितीय ), 2017



" धैर्य के दाने "


रश्मि सुमन


 		 
ज़िन्दगी मे खुशियाँ और गम 
मानो एक छोटी चिड़िया सी,
जैसे छोटी चिड़िया उड़ती हुई 
दूर.....बहुत दूर आकाश में जाती हुई विलीन सी हो जाती है आकाश के विस्तार में ,
ऐसे .....जैसे हो ही नहीं इस संसार में.....

सुख दुःख का स्वभाव भी एकदम पाखी जैसा ,
कभी छोटी चिड़िया सी फुदकती आती जीवन के आँगन में ,
और अपनी चहचहाहट से ज़िन्दगी गुंजायमान कर देती ,
तो कभी दुःख इंसान के पूरे वजूद को अपने गिरफ्त में कर लेता....

तब चिड़ियों की तरह ही ये हमारे धैर्य के दाने चुगते ,
और फिर यूँ उड़ते हुए विलीन हो जाते आकाश के विस्तार में ,
जैसे वाकई कभी थे ही नहीं 
हमारी ज़िन्दगी के संसार में....

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