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वर्ष: 2, अंक19, अगस्त(द्वितीय ), 2017



राखी कलाई पर


अशोक बाबू माहौर


 		 
राखी कलाई पर 
सजा रही 
बहन 
बाँटती खुशियाँ 
घर द्वार। 
भैया 
शायद बहन को 
दे रहे गिफ्ट 
किंतु बहन माँग रही 
वचन अटल विश्वास 
ताकि न हो वह उदास 
जग में हताश 
न हो उस पर 
जुल्म अनेक 
कहीं 
कभी 
किसी मोड़ पर।  

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