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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

दिल हुआ बेचैन

प्रीती श्री वास्तव

दिल हुआ बेचैन जो ख्याल आया आपका। कैसे मैं खोलूं नैन जो ख्याल आया आपका।। थी शिकायत आपको सदियों से हमसे साहिब। बहुत दिल जलाया जो ख्याल आया आपका।। मौत आने तलक अश्क बहते रहे मेरे बेहिसाब। जर्रा जर्रा कुम्हलाया जो ख्याल आया आपके।। दफन कर दी मैने हसरतें सभी फूलों के साथ। दिल रोया देकर दाद जो ख्याल आया आपका।।

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