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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

तू ही एक मेरा हबीब है

देवी नागरानी

तू ही एक मेरा हबीब है मेरी धडकनों के क़रीब है बड़ी मुश्किलों का है सामना कि सभी के सर पे सलीब है मेरे मर्ज़ की है शफ़ा तू ही तू ही लाजवाब तबीब है मेरी ख़्वाहिशों में शरीक तू मेरी ज़िंदगी तू नसीब है मुझे आज़माते हो बारहा तेरी कारवाई अजीब है

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