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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

गुण अवगुण

ओदाजी



मनुष्य भले हो या बुरे सभी ईश्वर की संतान है परन्तु ईश्वर आप को अच्छी संतान बनने का एक अवसर देता है और यदि आप उसको चुन लेते है और उसके लिए प्रयास करते है तो ये आप के अपने हित के लिए ही है ।

भलेउ पोच सब बिधि उपजाए। गनि गुण दोष बेद बिलगाए॥
कहहिं बेद इतिहास पुराना। बिधि प्रपंचु गुण अवगुण साना॥॥ (रामचरितमानस)

ईश्वर के लिए सभी जीव समान है परन्तु जब जीव कर्म करता है तो गुण और अवगुण को अर्जित करता है और उसी आधार पर शास्त्रों के द्वारा उनको वर्गीकृत कर दिया जाता है की कौन गुणवान है और कौन अवगुणी है यह सारा संसार इसी प्रकार से भेद रखता है तो जीव को बुरे कार्यों से मनाही करनी होगी और अच्छे कार्यों में लगना होगा । तभी वह गुणवान बन सकेगा और अवगुणों को दूर कर सकेगा I

ईश्वर ने संसार को गुण और अवगुण के आधार में ही बनाया है हर जगह और प्रत्येक वस्तु में द्वेष देखने को मिलता है जैसे सत्य-असत्य, अच्छा-बुरा, दिन-रात, सुख-दुःख, देव-दानव, उच्च वर्ण –निम्न वर्ण, अमृत –विष, स्वर्ग – नरक, राजा-मांगकर खाने वाला, धनवान-निर्धन इत्यादी ।

सत्य का समर्थक गुणवान है असत्य का समर्थक अवगुणी है जो अच्छे स्वभाव और कर्म का है वो गुणवान है और जो बुरे स्वभाव और कर्म का है वो अवगुणी है जो दिन में कार्य करता है और रात को सोता है वो गुणवान है इसके विपरीत वो अवगुणी है अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग में देव बनते है और बुरे कर्म वाले नरक या पाताल में जाते है और दानव बनते है जो पृथ्वी में रहते है यदि उन्होंने गुण अर्जन किये हैं तो वे उच्च वर्ण में जन्म लेते है इसके विपरीत, निम्न वर्ण में जाते है वो गुणवान होते है उनको अमृत मिलता है और अवगुणी को विष मिलता है और यदि चालाकी दिखाई जाती है तो राहू और केतु की तरह छिन्न भिन्न कर दिया जाता है तो अमृत का लाभ और स्वाद भी नहीं ले पता है इत्यादी ।

तो जो सज्जन होते है वो हंस की तरह होते हैं - संत हंस गुण गहहिं पय परिहरि बारि बिकार॥ जैसे कहा जाता है की हंस को यदि दूध और पानी मिला कर दिया जाये तो वो वो उनको अलग कर देता है और उस में से दूध पी जाता है और पानी को छोड़ देता है। इसी प्रकार से, सज्जन हंस की तरह गुणों रूपी दूध को ग्रहण करते है और अवगुण रूपी पानी को छोड़ देते है । और हमें इसकी प्रेरणा कौन देता है ये प्रेरणा तभी होती है जब ईश्वर की कृपा होती है - अस बिबेक जब देइ बिधाता। तब तजि दोष गुणहिं मनु राता॥ तो उसके लिए गुणों पर विचार करना होता है और उसी के अनुसार आचरण भी करना होता है और इनके विकार के लिए एक बात और भी है वो है - हानि कुसंग सुसंगति लाहू। अर्थात संग कैसा है यदि कुसंग होगा तो अवगुण होंगे और हानि होगी और यदि संग होगा तो गुण होंगे और लाभ होगा । तो चुनाव आप का जीवन आप का और परिणाम भी आप का है तो बताये किस को अपनायेंगे आप !


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