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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

कोरोना काल में बेरोजगारी और नियोक्ता की परेशानी

गोपाल कृष्ण पटेल

कोरोना का प्रकोप भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कहर साबित हो रहा है।कोरोना लॉकडाउन की वजह से भारत की बेरोजगारी दर में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है। भारत के असंगठित क्षेत्र के 40 करोड़ से अधिक श्रमिक कोरोना से हुए लॉकडाउन से प्रभावित हो सकते हैं। जिससे उनका रोजगार और कमाई प्रभावित हुआ है।लॉक डाउन की वजह से सिर्फ जरूरी सेवाओं और दुकानों को छोड़कर बाकी सभी तरह के रोजगार-धंधे पूरी तरह से बंद हो चुके थे। भारत इस महामारी से उत्पन्न होने वाली स्थितियों से निपटने के लिए अपेक्षाकृत सबसे कम तैयार था। इस वजह से इसका असर देश के अंसगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ा और वे बेरोजगारी और गरीबी के गहरे दुष्चक्र में फंसते चले गए।भारत सरकार कोविड-19 कोरोना और लॉकडाउन से उत्पन्न होने वाले चुनौतियों से तैयार नहीं था।

गौरतलब है कि लॉकडाउन को लागू करते वक्त पीएम नरेंद्र मोदी ने सभी नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को बनाए रखने और उन्हें समय से पूरा वेतन जारी करने की एडवायजरी जारी की थी। लेकिन लॉकडाउन होने के बाद से ही तमाम संगठित और असंगठित क्षेत्रों से वेतन कटौती और छंटनी की खबरें आने लगी हैं।कोरोना संकट के कारण इस समय कामगार और कारोबार दोनों भयावह वक्त का सामना कर रहे हैं। इस संकट को खत्म करने के लिए सरकारों को तेजी से कदम उठाने होंगे। सही दिशा में उठाया गया कदम ही इस समय में निर्णायक साबित होगा।भारत में, जहां कि संगठित सेक्टर असंगठित की तुलना में छोटा है, रोज़गार और वेतन को लेकर अधिक लचीलापन असंगठित क्षेत्र में है। इसका मतलब है, छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय– हमारे मुख्य रोज़गार प्रदाता– धंधे में बने रहने के लिए तेज़ी से नौकरियों के अवसर कम करेंगे।

यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा संकट और पिछले 75 वर्षों के दौरान अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सबसे बड़ी परीक्षा है। यदि कोई एक देश विफल होगा, तो हम सभी विफल हो जाएंगे। हमें ऐसे समाधान खोजने होंगे जो वैश्विक समाज के सभी वर्गों की मदद करें। विशेष रूप से उनकी जो सबसे कमजोर हैं या जो अपनी मदद करने में खुद सक्षम नहीं हैं।


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