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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

आत्म गौरव का सुख

डॉ आर बी भण्डारकर

तनु बहुत खुश है।खुश हो भी क्यों न हो ; पति की अनुपस्थिति में उसने सम्पूर्ण व्यवसाय भलीभाँति सम्हाला हुआ है जो।

पलंग पर लेटी लेटी वह यह सोच सोच कर मगन हो रही है कि कनु आते ही बड़े प्रसन्न होंगे;और पक्के तौर पर कहेंगे -" वाह तनु तुमने तो सचमुच में ही कमाल कर दिया।"

तनु दिन भर की थकी -मांदी थी सो नींद जल्दी ही आ जाती है।.......वह नींद में है पर स्वप्न-जगत में उसके मानस पटल पर अतीत की स्मृतियाँ तिरने लगी हैं।

"माता-पिता की लाडली तनु;जो पढ़ना चाहा वह पढ़ने का अवसर मिला।डिजिटल कम्युनिकेशन में गोल्ड मेडल सहित एम टेक किया।नौकरी का प्रयास कर ही रही थी कि शादी हो गयी।सौभाग्य से अच्छा घर,वर मिला।पति कनु सुंदर सुशील; एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में बड़े ओहदे पर।शादी के बाद तनु ने पति से जब अपनी नौकरी के बारे में चर्चा की तो पति ने बड़े मनुहार करके रोक दिया-क्या करोगी नौकरी करके तनु,घर पर पिता की इतनी सम्पत्ति है, मुझे भी अच्छी-खासी तनख्वाह मिलती है।

तनु ने जिद नहीं की, पति की बात को मानना ही श्रेयस्कर समझा।

वक्त का उलट फेर हुआ।कोविड-19 का संकट गहराया;लॉक डाउन हो गया।कुछ दिन "वर्क फ्रॉम होम" चला।लॉक डाउन हटा तो कनु छंटनी का शिकार हो गया।

उस दिन कनु जब बुझा-सा चेहरा लेकर घर लौटा तो तनु के मन मे खटका हुआ।कुछ देर में सारी स्थिति जानकर तनु ने पति को ढाढस बंधाया।

क्यों न हम लोग मिलकर घर से ही सॉफ्टवेयर का व्यवसाय शुरू करें।कनु को प्रस्ताव पसंद आया।दोनों ने अपना व्यवसाय शुरू कर दिया।तनु कंधे से कंधा मिलाकर रात दिन मेहनत करने लगी है।

अभी सप्ताह भर पहले ही हवाई सेवा शुरू हुई और उसी दिन अपने व्यवसाय के सिलसिले में कनु बंगलुरु चले गए।कनु की अनुपस्थिति में तनु ने स्वतंत्र रूप से काम करके व्यवसाय का ऐसा प्रबंधन किया कि कोई भी मुग्ध हुए बिना नहीं रह सकता।तनु इसी आत्म-गौरव से अभिभूत है।"

स्वप्न तिरोहित होता है।आत्म-सन्तोष की गहरी नींद तनु को अपने आगोश में ले लेती है।


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