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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

बड़े आदमी

पवनेश ठकुराठी



"माँ, विक्की लोगों के पास तो टीवी है, कार है और एक बड़ा-सा घर है। हमारे पास क्यों नहीं है ?"

"बेटा, विक्की के पापा बड़े आदमी हैं। उनके पास बहुत सारे पैसे हैं।"

"अच्छा ! तो फिर उस दिन विक्की के पापा ने हमें संतरों के पांच रूपए कम क्यों दिये...?"


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