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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

उड़ान

पवनेश ठकुराठी



"माँ, क्या मैं भी चिड़ियों की तरह उड़ सकती हूँ ?"

"हाँ बेटी, जरूर उड़ सकती हो।"

"लेकिन मम्मा, मेरे तो पंख ही नहीं हैं !"

"बेटी, इंसान पंखों से नहीं बल्कि अपने हौसलों से उड़ान भरते हैं।"


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