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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

हौंसला और चिंता ......

वीरेन्द्र कौशल

हौंसला और चिंता एक तरफ प्रत्येक बेटे के बड़े होने पर हर बाप को होता बड़ा हौंसला बेटा चाहे कितना भी निक्कम्मा क्यों न हो और दूसरी तरफ हर बेटी के बड़े होने पर हर पिता को होती बहुत भारी चिंता चाहे बेटी कितनी भी होनहार क्यों न हो वज़ह शायद हमारी सामाजिक सोच और रिति-रिवाज़ हौंसला और चिंता ... हौंसला और चिंता ...


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