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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

पिता ...क्या होता है ....

वीरेन्द्र कौशल

कभी समझा क्या कि पिता क्या होता है कभी जाना कि पिता पिता क्यों होता है पिता सदा सुनहरे पल सा एहसास होता है औलाद का तो सदा से श्वास होता है परिवार का पूरा ही दृड़ विश्वास होता है घर का मज़बूत स्तंभ व शिलान्यास होता है नेक इरादों की सदा ही प्यास होता है कठोर बाहर मगर अन्दर नर्म बॉस होता है पिता सदा ही एक क्यास होता है पिता हमेशा ही सार्थक दास होता है पिता घर का शालीनता भरा लिबास होता है पिता दूर हो कर कितना पास होता है पिता ऊलझनों में भी न निराश होता है पिता हालात से न कभी हताश होता है पिता खाली होते भी भरा गिलास होता है पिता हर किसी का बहुत खास होता है पिता हर किसी का ..... पिता हर किसी का ....


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