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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 90,अगस्त(प्रथम), 2020

महत्त्व

सुनील चौरसिया 'सावन'

भूत - भविष्य की चक्की में पिस रही ज़िन्दगी, कौन समझता है- वर्तमान का महत्त्व दुख - दर्द की कहानी बन जाए उपन्यास, कौन समझता है - मुस्कान का महत्त्व जमाने की खुशी हेतु जान दे दी उसने, कौन समझता है यहां जान का महत्त्व, पसीने की खुशबू से भी आती है बदबू कौन समझता है- किसान का महत्त्व, मुफ्त में मिली गीता सिसक रही कोने में, कौन समझता है यहां ज्ञान का महत्त्व ओह! मर गयी मानवता भौतिकता के पीछे, कौन समझता है - ईमान का महत्त्व 'सावन'! पावन है ज़िन्दगी जो मुफ्त में मिली, कौन समझता है- जीवनदान का महत्त्व स्नेह, सम्मान, सदाचार से सुसज्जित, कौन समझता है- इन्सान का महत्त्व, मुफ्त में मिले महत्त्व का समझना महत्त्व, कौन समझता है जी! महत्त्व का महत्त्व उतना ही देना, हो जितना महत्त्व कहीं घट न जाए जी! महत्त्व का महत्त्व


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